
- अब एयर स्ट्राइक के भी एक महीने बाद चुनाव
- माेदी ने भी चूरू में सभा की, अब कितनी सीटें मिलेंगी?
जयपुर (कपिल भट्ट). लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है। राजस्थान में पिछले 20 साल से विधानसभा चुनाव के कुछ महीनों बाद ही लोकसभा चुनाव होते आ रहे हैं। ऐसा ट्रेंड चल रहा है कि विधानसभा चुनाव में जो पार्टी सत्ता में आती है, लोकसभा चुनावों में भी उसी का दबदबा रहता है। मगर 1999 में हुए लोकसभा चुनाव में ऐसा नहीं हुआ था। दरअसल, 1999 के आम चुनाव कारगिल युद्ध के एक महीने बाद ही हुए थे। कारगिल की लड़ाई जुलाई 1999 में खत्म हुई थी। और लोकसभा चुनाव सितंबर-अक्टूबर में हुए। इस बार भी कुछ ऐसी ही तस्वीर बनती दिख रही है। आने वाले लोकसभा चुनाव पुलवामा आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के अड्डे पर एयर स्ट्राइक के तुरंत बाद हो रहे हैं। क्या आगामी चुनावों पर इसका असर पड़ेगा?
यूं पलटी बाजी...विस चुनाव में भाजपा की 200 में 33 सीटें थीं :
दिसंबर 1998 में राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 153 सीटें जीतीं। भाजपा 200 में से सिर्फ 33 सीटों पर सिमट गई। लेकिन इसके आठ माह बाद हुए लोकसभा चुनावों में भाजपा ने 25 में से 16 सीटें जीत लीं। विधानसभा चुनावों के मुकाबले लोकसभा चुनावों में भाजपा के वोटों में 14 प्रतिशत का इजाफा हुआ। जो 20 सालों में सबसे ज्यादा है। 1998 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 33.23% वोट मिल सके थे जबकि 1999 के लोकसभा चुनावों में उसे 47.23% वोट मिले।
दिसंबर 1998 में राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 153 सीटें जीतीं। भाजपा 200 में से सिर्फ 33 सीटों पर सिमट गई। लेकिन इसके आठ माह बाद हुए लोकसभा चुनावों में भाजपा ने 25 में से 16 सीटें जीत लीं। विधानसभा चुनावों के मुकाबले लोकसभा चुनावों में भाजपा के वोटों में 14 प्रतिशत का इजाफा हुआ। जो 20 सालों में सबसे ज्यादा है। 1998 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 33.23% वोट मिल सके थे जबकि 1999 के लोकसभा चुनावों में उसे 47.23% वोट मिले।
तब... वाजपेयी ने जाटों को ओबीसी में लेने की घोषणा की :
1999 में भाजपा के चुनावी पलटवार की एक वजह राजस्थान के जाटों को ओबीसी में शामिल करने की प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की घोषणा को भी माना जाता है। इसकी वजह से कांग्रेस का यह परंपरागत वोट बैंक छिटककर भाजपा के पास आ गया। चुनाव से कुछ समय पहले ही वाजपेयी ने सीकर की एक सभा में राजस्थान के जाटों को ओबीसी में शामिल करने का ऐलान किया था।
1999 में भाजपा के चुनावी पलटवार की एक वजह राजस्थान के जाटों को ओबीसी में शामिल करने की प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की घोषणा को भी माना जाता है। इसकी वजह से कांग्रेस का यह परंपरागत वोट बैंक छिटककर भाजपा के पास आ गया। चुनाव से कुछ समय पहले ही वाजपेयी ने सीकर की एक सभा में राजस्थान के जाटों को ओबीसी में शामिल करने का ऐलान किया था।
इस बार... मोदी ने पिछड़े सवर्णाें को आरक्षण दे दिया :
पिछले दिनों ही मोदी सरकार ने आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को 10% आरक्षण देने की घोषणा की थी। ऐसे में इन चुनावों में भी आरक्षण के दांव पर नजरें हैं।
तब यूं मिला माइलेज :
केंद्र की तत्कालीन भाजपा सरकार को कारगिल विजय का चुनावी लाभ मिला था। वह लोकसभा में 182 सीटें जीती थी, जो तब भाजपा की सबसे बड़ी जीत थी।
2003 से यही ट्रेंड चल रहा विधानसभा चुनाव जीतने वाली पार्टी सरकार बनाती है :
राजस्थान में 2003 से यह ट्रेंड चल रहा है कि विधानसभा चुनाव जीतकर जो पार्टी सरकार बनाती है, लोकसभा चुनावों में भी उसी पार्टी को ज्यादा सीटें मिलती हैं। यही नहीं विधानसभा चुनावों के मुकाबले वोट शेयर भी 10% से ज्यादा तक बढ़ जाता है।
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